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Monday, May 25, 2009

Aap Mujh Se Bade Hain

आप का आदर करूँ, सम्मान करूँ, सत्कार करूँ
आपकी हर बात मानूँ, क्यूंकि आप मुझ से बड़े हैं
जिस दरवाज़े पर मैंने आज दस्तक दी है
आप भी बरसों से उसके बाहर खड़े हैं
मुझसे ज्यादा फल खाए और झेले हैं कांटे भी
और हर फल की शक्ल जुदा थी स्वाद एक था
हर कांटे की शक्ल जुदा थी वार एक था
काटों के इस जर्जर तन को नमन करूँ
या एक और फल के इच्छुक इस मन को नमन करूँ
बरसों तक खुद से लड़े हैं फिर भी मैदान मैं खड़े हैं
आप बेशक मुझ से बड़े हैं, आप बेशक मुझ से बड़े हैं!!!

Kalam

कल रात कुछ लिखने बैठा तो कलम दूर जा कर बैठ गयी
अपनी ताकत पर ऐंठ गयी और बोली तेरे मेरे रास्ते बँट गए हैं
तुझे दिखाई नहीं देता मेरे होंठ फट गए हैं
थक गयी हूँ लिखते - लिखते तेरे सच्चे झूठे किस्से
आज क्या नयी बात लिखेगा, वही सुबह वही रात लिखेगा
थोडा पुण्य पाप लिखेगा, फिर खुद को बेताब लिखेगा
अपनी बेताबी की धुन में मेरे दुःख को भूल गए हो
एक वाह की चाह में जाने क्यूँ तख्तो पे झूल गए हो
वैश्या बना रखा है, किसी के भी कोठे पर नचवा देते हो
चंद पैसों के लिए कुछ भी लिखवा देते हो
एक प्रेमी ने मुझे बनाया, मुझसे प्रेम पत्र लिखवाया
आज में ढोंगी की बेटी हूँ,
रोज बेचता है मुझको, बात समझ में आई तुझको
मैं बोला चुप हो जा पगली
यूँ भावों मैं मत बहका
भाव होते तो लेखक या कवी बनता?
सीमा पर जा कर डट जाता अब तक तो शायद मर जाता
पर मरना नहीं मुझे जीना है, इसलिए ज़हर तुझे ये पीना है
मैं जो बोलूं तुझे लिखना है, दोनों को एक सा दिखना है!!!

Friday, March 27, 2009

Massom Si Mohabbat

मासूम सी मोहब्बत का बस इतना सा फ़साना है,
कागज़ की हवेली है, बारिश का ज़माना है
क्या शर्त-ऐ-मोहब्बत है, क्या शर्त-ऐ-ज़माना है
आवाज़ भी ज़ख्मी है और वो गीत भी गाना है
उस पार उतरने की उम्मीद बहुत कम है
कश्ती भी पुरानी है, तूफ़ान भी आना है
समझे या ना समझे वो अंदाज़-ऐ -मोहब्बत का
एक ख़ास को आँखों से एक शेर सुनाना है
भोली सी अदा, कोई फिर इश्क की जिद पर है
फिर आग का दरिया है.. और डूब के जाना है
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मंजिल भी उसकी थी रास्ता भी उसी का था
मैं अकेला था काफिला भी उसी का था
साथ साथ चले की सोची फिर रास्ता बदलने का फैसला भी उसी का था
आज तनहा दिल ये सवाल करता है
लोग तो उसी के थे,क्या खुदा भी उसी का था

Koi Deewana Kehta Hai - Dr. Kumar Biswas

कोई दीवाना कहता है,कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है

मुहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आँखों में आँसू हैं
जो तू समझे तो मोती है, ना समझे तो पानी है

बहुत टुटा बहुत बिखरा थपेडे सह नही पाया..
हवाओं के इशारो मे, मगर मैं बह नही पाया...
अधूरा अनसुना ही रह गया ये किस्सा मुहब्बत का
कभी तू सुन नही पायी कभी मैं कह नही पाया...

समंदर पीर के अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आँसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता
मेरी चाह्त को अपना तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता

की भंवर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा

स्वयं से दूर तुम भी हो.... स्वयं से दूर हम भी है...
बड़े मशहूर तुम भी हो...बड़े मशहूर हम भी है..
बड़े मगरूर तुम भी हो... बड़े मगरूर हम भी है..
अथः बड़े मजबूर तुम भी हो,बड़े मजबूर हम भी है...